सफ़र एक शुरुआत

चल पड़ो उस राह में जहां डगर नई सी हों।
शहर नया सा हों और सहर नई सी हों।
नए से हो चेहरे, जुबां नई सी हों।
खिलखिलाते चेहरों पर मुस्कान नई सी हो।

One Comments

  • Chyna July 25, 2016 Reply

    Thanks for spending time on the computer (wirnitg) so others don’t have to.

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