तुर्की यात्रा तीसरा दिन: अंडर ग्राउंड सिटी

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Castle देखने के बाद हमारा अगला पड़ाव बना अंडर ग्राउण्ड सिटी. जैसा कि नाम से आप समझने ही गए होंगे, यह जगह बिलकुल अंडर ग्राउंड सिटी ही निकली.

हम अपने टूर ग्रूप के साथ यहाँ पहुँचे, बाहर से देखने पर बस टीला सा दिखाई दिया। थोड़ी देर आगें बड़ने पर एक गेट नज़र आया और गेट के बग़ल में टिकट काउंटर। टिकट काउंटर पर प्रवेश शुल्क के बारे में लिखा था, 15 TRY  ( लगभग ₹ 275). 

क्यूँकि हम ShahMat Tours के साथ आए थे और जैसा कि में पहले भी बता चुका हु की यहाँ टूर का प्रबंधन बढ़िया रहा, हमें ना तो लाइन में लगना पड़ा और ना हीं टिकट लेना पड़ा। हमारा टिकट पहले से ही ले लिया गया था। हमारे गाइड ने हमें दिशा निर्देश देना शुरू किया और बताया की हम लोग चार मंज़िल नीचे तक जाएँगे, कुछ रास्तें सकरे होंगे और उनसे गुज़रने के लियें क़मर तक झुकना पड़ेगा। सारी बातें सुन कर डर भी लगा और रोमांच का भी अनुभव हुआ।

मैंने क़मर का बेल्ट कसा और शोना बिटिया को सिने के सहारे लगाया और ऊपर वाले का नाम लेकर बस क़दम आगे बड़ा दिए। पहले, दूसरे और तीसरी मंजिल से होते हुए हम नीचे चौथें मंजिल पर पहुँचे।

सबसें रोमांचित कर देने वाला जों 1 मिनट रहा वो था संकरा गलियारां, जहाँ हम सबको बक़ायदा 4 फ़ीट की गली में से क़मर तक झुकते हुए निकला पड़ा। जैसे ही हम सकरें गलियारें के छोर पर पहुँचे तो जान में जान आयीं। लेकिन आश्चर्य करने वाली बात थीं कि जिस जगह पर हम 30 मिनट में घुटन महसूस करने लग गये थे वहाँ लोगों ने महीनो गुज़ारे थे।

कुछ तथ्य अंडर ग्राउंड सिटी के बारें में 

अंडर ग्राउंड सिटी के टूर के बाद समय हो चला था भोजन का। मेरे मन में बस यही सवाल चल रहे थे कि ख़ाने में शाकाहारी (वेज) क्या होगा?

ख़ाने की मेज़ पर हमें 5-6 तरीक़े के चटनियाँ दिखाई पड़ी, साथ सलाद भी था। सबसे बड़ा सर्प्राइज़ जो आया वो  कुछ एसा दिखाई दिया 

थोड़ी देर तक में सोचता और समझता रहा कि भला यह क्या बला हैं? बाद में हमारे गाइड ने विस्तार से बताया की यह एक पारंपरिक तरीक़ा हैं मीट पकाने का और इस डिश में कई तरीक़े के मीट का प्रयोग होता हैं। देखने और सुनने में लगा तो अच्छा पर ख़ाने से हमने तौबा किया और पूछा वेज में कुछ मिलेगा या चटनियों से ही कामचलाना पड़ेगा?


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