तुर्की यात्रा दूसरा दिन: इस्तांबुल की सुबह

इस्तांबुल की सुबह –

कल शाम को हम दो महाद्वीपो और ३ शहरों की उड़ान की बाद इस्तांबुल पहुँचे। इस जादूई शहर का अपना ही एक आकर्षण है।

कल शाम अपने होटल पहुँचने और डिनर के बाद हमने आराम करना ठीक समझा, क्यूँकि तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह हमें इस्तांबुल के वॉकिंग टूर पर जाना था और थोड़ी बहुत हवाईं यात्रा की थकान भी जो थीं। सुबह के लगभग 5:30 बजे ही मेरी नींद खुल गयीं। बालकनी से बाहर झाँककरदेखो तो हल्की हल्की बूँदबाँदी हो रही थी। मौसम बड़ा ख़ुशनुमा सा था और हल्की ठंड सी लग रही थीं। मेरे मन में होटल की छत जहाँ रेस्तराँ भी हैं वहाँ जाकर शहर का नज़राना देखने का विचार आया। लिफ़्ट से मैं ऊपर छत पर पहुँचा, हल्की हल्की बारिश अभी भी ही रही थीं, पर यहाँ से शहर की अलग ही झलक देखने को मिली। बहुत कुछ दृश्य मुंबई जैसा ही लग रहा था। काले बादलो के पीछे छुपा हुआ सूरज, गिली सड़के और एका दुक़ा लोग इधर उधर जाते हुए। चूँकि दुबई में अमूमन बारिश नहीं होती हैं इसलिए नए शहर में नज़ारा बड़ा अच्छा लगा।

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मैंने बिना वक़्त गँवायें अपना कैमरा निकला और यादों को क़ैद करना शुरू कर दिया। कुछ झलकियाँ

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सुबह के ९ बज चुके थे और तय कार्यक्रम के हिसाब से हमें पुराने शहर में वॉक टूर पर निकला था लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थीं। कुछ देर इंतज़ार करने के बाद हमने टूर आयोजक को फ़ोन करके आज का टूर रद्द करवा दिया। वैसे बारिश में जाना किसे पसंद नहीं लेकिन मामला हमारी छोटी बिटियाँ का था जो एक साल की भी नहीं हुयी थीं, इसलिए हमने होटेल में ही रहना ठीक समझा।

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लगभग एक घंटे के बाद जब बाहर मौसम का जायज़ा लेने के लिए नज़रें दौड़ाई तो देखा सूर्य देवता खिलखिला रहे थे और मानो कह रहे थे की ‘मुझे थोड़ी देर क्या हुयी तुमने अपना प्लान ही बदल लिया।’ अगले ही पल बिना और वक़्त गँवायें हम सपरिवार यह सोचकर बाहर निकल पड़े की टूर ना सही पर स्मॉर्ट फ़ोन और गूगल के सहारे कही तो पहुँच ही जाएँगे।

Istanbul-Tram-Sultanahmet-4हम लगे गूगल से पूछने .. आगे का रास्ता

कुछ और यादें इस्तांबुल के पुराने शहर की

Istanbul-Tram-Sultanahmet-2

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दिन के भोजन का समय हो चला था और भूख भी बड़े ज़ोरों की लगी थीं। क्या खाया जाये ये सोचकर भारतीय खाने का ख़्याल आया, तुरंत अपना फ़ोन उठा कर Indian Restaurant सर्च किया। गूगल देव ने बताया की पास ही में स्वाद नाम का रेस्तराँ है। गूगल मैप्स की सहायता से हम निकल पड़े अपने ‘स्वाद’ की तलाश में। काफ़ी मशक़्क़त के बाद भी हमें रेस्तराँ नहीं मिला, लगभग आधे घंटे तक हम दो गलियों के बीच घूमते रहे। भूख अपने उफान पर थीं, तभी हमारी नज़र दूर एक छोटें से बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा था स्वाद इंडीयन रेस्ट्रॉंट।

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रेस्तराँ की सजावट सादी सी थीं। मेन्यू में भारतीय डिशेज़ के नाम पढ़ने के बाद मन को बड़ा अच्छा लगा और हमने पनीर ऑर्डर करने का मन बनाया। इधर भूख का ज़ोर बड़ता जा रहा था, हमने तुरंत ऑर्डर करने के लिए वेटर को बुलाया। हमारे मुँह से पनीर शब्द निकला ही था की वेटर महोदय ने कहा अभी भारतीय खाना नहीं मिल पायेगा क्यूँकि भारतीय शेफ़ छूटी पर हैं। इधर भूख सातवें आसमान पर थीं हमने कोई भी डिश लाने को कहाँ जो जल्दी बन जाए और वेज ( शाकाहारी) हों। इसी बीच रेस्तराँ वाले ने हिन्दी गाना लगा दिया यह सोच कर की खाना नहीं गाना तो Indian हैं।
फ़ोटो रेस्तराँ और खाने के


खाने के दौरान पता चला की वहाँ India के एक गुजराती भाई भी काम करते हैं। बातों बातों में पता चला की वह इस्तांबुल में पिछले सात सालों से रह रहे हैं।

भोजन समाप्ति के बाद हमने लम्बी वॉक पर जाने का प्लान बनाया। गूगल मैप के सहायता से हम लोग समंदर किनारा की और चल पड़े। इस्तांबुल की संकरी पुरानी गलियों से होते हुए हम चलते रहे। रास्ते में एक ठेलें वाला मिला जो चेरी फल बेच रहा था। चेरी वाले से मोल भाव किया, भले ही ना तो उसे और ना हमें उसकी भाषा आती थीं, फिर भी इशारों में दाम भी तय हो गए और सौदा भी हो गया। चेरी खाते खाते और मौसम का मज़ा लेते हुए काफ़ी देर चलने के बाद आख़िरकार हम लोग समंदर किनारे पहुँच गये।

एसा रहा हमारा वॉकिंग टूर

 

समंदर किनारे कुछ फ़ोटो खिंचवाए और गरमागरम Hazelnuts खायें ( तुर्की Hazelnuts का सबसे बड़ा उत्पादक देश हैं, दुनिया का 80% उत्पादन अकेला तुर्की करता हैं। काले बादल फिर से घिर आए थे इसलिए वापसी करना ठीक समझा। काफ़ी कोशिश के बाद भी टैक्सी नही मिलीं यो हम पैदल ही निकल पड़े। होटेल पहुँच कर अगले दिन की तैयारी करी, क्यूँकि अगले दिन सुबह 5:00 बजे हमें निकलना था और कैपेडोकीया की फ़्लाइट पकड़नी थीं। मैंने मार्केट जाकर अपने डॉलर को तुर्की लीयरा में इक्स्चेंज करवलिया ताकी बाक़ी सफ़र में परेशानी ना झेलना पड़े।

 

20 Comments

  • Manoj June 28, 2016 Reply

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  • Manish Kumar July 12, 2016 Reply

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