जिंदगी एक सफ़र

“जिंदगी एक सफ़र” यह एक लाइन हम सबने कई बार और बारंबार सुनी हैं, चाहे वह अंदाज़ फिल्म में किशोर कुमार की आवाज़ में गाया हुआ गाना हो (जिंदगी एक सफ़र हैं सुहाना ….. )

जिसमे राजेश खन्ना आने वाले कल की मुश्किलों से बेफिकर दिखाई पड़ते हैं

या सफ़र फिल्म में किशोर दा की ही आवाज़ में वही राजेश खन्ना इस सफर को समझ न पाने की बाते करते हैं (जिंदगी का सफ़र, हैं ये कैसा सफर…….).

जिंदगी के सफर में तो हम निरंतर आगे बढते ही है पर कर बार हर रोज की दिनचर्या से ऊब जाने पर इंसान सफ़र पर निकल पड़ता हैं

इंसान की फितरत हैं नयेपन की खोज और इसी खोज में वह नई जगह के लिए चल पड़ता हैं.  बस इन्ही सफरो से बन जाता है सफ़रनामा

Leave a Reply